बुधवार, 3 जून 2009

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1 टिप्पणी:

  1. जिंदगी जिंदादिली का नाम है
    स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागृति बढ़ी है।धीरे- धीरे जॉगिंग एक ट्रेंड बनता जा रहा है। अब आप एक छह साल के बच्चे से लेकर साठ के बूढ़े को भी कदम से कदम मिलाते देख सकते हैं। इसका कारण लोगों की जीवन पद्धति में आया परिवर्तन है। नई जीवन पद्धति आने के साथ ही लोगों के काम करने का तरीका भी बदल गया है। अब शारीरिक श्रम की तुलना में लोगों को मानसिक श्रम ज्यादा करना पड़ता है, खासकर शहरी वर्ग के लोगों को ऑफिसों में ज्यादातर काम कम्प्यूटर पर होने के कारण उन्हें लम्बे समय तक एक ही जगह बैठ कर काम करना पड़ता है। जिसके कारण उनके शरीर में अकड़न आ जाती है। जीवन में प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा बड़ गयी है कि लोग हँसना भूल गये हैं। इसका परिणाम है कि अपने तन और मन दोनों को स्वस्थ रखने के लिए नई नई युक्तियाँ खोजी जा रहीं हैं।
    हँसना मानसिक स्वास्थ के लिए उतना ही जरूरी है जितना जीने के लिए भोजन। कहावत भी है जिंदगी जिंदादिली का नाम है मुर्दादिल क्या खाक जिया करते हैं। हँसी के ठहाके बड़ी से बड़ी परेशानी से आपको पल भर में मुक्त कर देते हैं।
    मेरा मानना है कि यदि आप इन उपायों को अपना लें, तो जिंदगी की अनेक समस्याएं यूँ पंख लगा के उड़ जायेंगी की आपको मालूम भी नहीं पड़ेगा। इसके लिए आपको सबसे पहले उन चीजों पर गौर करना पड़ेगा जिनको करने से आपको खुशी मिलती है।
    घर से बाहर निकलिए, लोगों से मिलिए जुलिए जरूरी नहीं की कोई एक ही मुलाकात में आपसे दोस्ती कर ले। लेकिन कोशिश जारी रखिये।
    वो तनाव जो सिर पर लादे आप घूम रहे हैं और आपने मान लिया है कि आपके बगैर दुनिया नहीं चल सकती, तो ये आपका ख्वाबो ख्याल है इसे अपने दिमाग से निकाल दीजिये। दुनिया आपके भरोसे नहीं चल रही है। आपके होने या न होने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। ये सिर्फ आपका वहम है इसे अपने दिमाग से निकाल दीजिये। खुद हंसिये और दूसरों को हंसाइये। तनाव खुदबखुद आपसे दूर भाग जायेगा।
    खुद पर हँसना सीखिये। परेशानियों के बीच भी खुशी के मौके तलाशिये। केले के छिलके पर फिसलने पर गुस्सा करने के बजाय दूसरो के साथ मिल कर खुद भी हँसिये, विश्वास करिये आपको अच्छा लगेगा।
    जिंदगी के प्रति सकारात्मक रुख अपनाइये। हँसने के मौकों की तलाश कीजिये ताकि बोझिल हो रहे पलों को हल्का बनाया जा सके। हर चीज बेकार है और बोरिंग है जैसी बातें आपको खुश कम दुखी ज्यादा करेंगी।
    कभी कभी ऐसा होता है कि मॉल से खरीदी गई कोई चीज हम वापस करने जाते हैं। लंबे इंतजार के बाद जब हमारा नंबर आता है तो पता चलता है कि सामान वापस नहीं हो सकता। ऐसे में आपका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच जाता है ऐसे वक्त यदि कोई नन्हा मुन्ना अपनी चॉकलेट पाने के लिए बार बार आपको अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करे तो क्या बिना मुस्कारएं रह सकते हैं। सोच कर देखिये?
    दुनिया क्या कहती है इससे हमें कोई मतलब नहीं, हमें क्या अच्छा लगता है , हमें किससे खुशी मिलती है यह महत्वपूर्ण है। इसलिए कौन क्या कहता है इस पर कभी ध्यान मत दीजिये, आपका मन क्या कहता है बस वही महत्वपूर्ण है। इसलिए वही कीजिये जो आपको अच्छा लगता है।
    लेकिन अंत में इतना जरूर कहना चाहूँगी, खुशियां बाजार में नहीं मिलती, अगर ऐसा होता तो दुनिया का कोई भी अमीर आदमी दुखी नहीं होता। खुशियां आपके अंदर हैं, बस अन्हें पहचानने की जरूरत है। इसके बावजूद अगर आपको ऐसा लगता है कि ये सब चीजें आपको खुशियां नहीं दे सकतीं तो सुबह उठ कर उन पार्कों में जाइये जहाँ खुशी की तलाश में नकली ठहाके लगाते लोग मिल जायेंगे।
    -प्रतिभा वाजपेयी

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